हमारी दुनिया: बेटियों की बेटी (नातिन) की कहानी

नमस्कार दोस्तों, जय श्री राम! कैसे हैं आप सब?आज ‘हमारी दुनिया’ में हम लेकर आए हैं बेटियों की बेटी, यानी नातिन की कहानी। मम्मी-पापा को बेटियाँ तो प्यारी होती ही हैं, पर बेटियों की बेटी (नातिन) बेटियों से भी ज़्यादा प्यारी होती है। जब वह अपनी तोतली आवाज़ में ‘नाना-नानी’ बोलती है, तो मम्मी-पापा की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। वे हम लोगों के नखरे तो उठाते ही थे, पर अब हमारी बेटियों यानी अपनी नातिन के नखरे भी बड़े चाव से उठाते हैं।उसकी शैतानियों और शरारतों में वे हमारा बचपन ढूंढते हैं। वक्त बदल गया है, हम लोग बड़े हो गए और मम्मी-पापा अब बूढ़े हो गए हैं। हमारे बचपन के दिनों में मम्मी-पापा हमारे भविष्य के लिए बहुत मेहनत करते थे, जिसकी वजह से वे शायद हमारा बचपन खुलकर नहीं देख पाए। लेकिन अब हमारे बच्चों में वे हमारा वही बचपन दोबारा देखते हैं और उसे खुलकर जीते हैं।हम लोग भी अपने नाना-नानी को बहुत मिस (याद) करते हैं। आप लोगों में से भी बहुत से ऐसे लोग होंगे, जो अपने नाना-नानी को बहुत मिस करते होंगे। कमेंट में ज़रूर बताएं!

5 thoughts on “हमारी दुनिया: बेटियों की बेटी (नातिन) की कहानी”

  1. बचपन में मायका और शादी के बाद ससुराल, लेकिन सच्चाई तो ये है कि बेटी हर घर में ‘घर की लक्ष्मी’ बनकर उसे महका देती है!

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