नमस्कार दोस्तों, ‘हमारी दुनिया’ (humariduniya.in) में आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है। ओम नमः शिवाय। ✨
आज सोमवार है और हमारे वीकली शेड्यूल के अनुसार आज का विषय है ‘हमारे बुजुर्ग’। वैसे तो बुजुर्ग हर घर में होते हैं, लेकिन क्या उनकी अहमियत और कदर हर घर में होती है? शायद नहीं। आज मैं आपके साथ एक ऐसे विषय पर बात करने जा रही हूँ, जो हमारे समाज का एक बहुत ही कड़वा और दर्दनाक सच है।
सड़कों और वृद्धाश्रमों में सिसकता बुढ़ापा
आजकल आपने अपने आस-पास, सड़कों के किनारे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और रेड लाइट पर बहुत से बुजुर्गों को लाचार बैठे या भीख मांगते हुए देखा होगा। हमारे देश के वृद्धाश्रम भी ऐसे ही बेसहारा बुजुर्गों से भरे पड़े हैं। इन्हें देखकर मन में एक ही सवाल उठता है—आख़िर क्यों?
क्या इनका कोई परिवार नहीं था? और अगर परिवार है, तो वो लोग कहाँ हैं? वो क्यों इन बुजुर्गों को अपने साथ नहीं रखते? क्यों अपने बूढ़े माँ-बाप को इस तरह तिल-तिल जीने के लिए मजबूर कर देते हैं?
गाँव का सन्नाटा और अकेलेपन का दर्द
मैंने खुद अपने गाँव में ऐसे बहुत से बुजुर्गों को अकेले रहते देखा है। उनके बेटे-बेटियां, नाती-पोते सब हैं, फिर भी वे एक कोने में अकेले चुपचाप अपनी मौत का इंतज़ार करते हैं। मुझे आज तक यह बात समझ नहीं आई कि अगर बुढ़ापे में अंततः अकेले ही रहना था, तो उन्होंने अपनी पूरी जवानी उन बच्चों के पीछे क्यों खपा दी?
दिन-रात मेहनत करके, अपनी इच्छाओं को मारकर बच्चों की हर ज़रूरत पूरी की। इससे तो अच्छा था कि वे पहले से ही अकेले रहते और अपनी ज़िंदगी को अपने तरीके से एन्जॉय करते! आख़िर क्या फायदा ऐसे बच्चों का, जो बुढ़ापे में लाठी बनने के बजाय बेगाना कर दें?
आराम की उम्र में काम का बोझ
जिस उम्र में इन बुजुर्गों को आराम करना चाहिए, हाथ में चाय का प्याला और नाती-पोतों का साथ होना चाहिए, उस उम्र में वे या तो भीख मांग रहे हैं या पेट पालने के लिए मजदूरी कर रहे हैं। क्या इनकी ज़िंदगी में आराम लिखा ही नहीं है?
क्या बच्चों का अपने माता-पिता के प्रति कोई फ़र्ज़ नहीं होता? क्या सारे फ़र्ज़ और बलिदान सिर्फ माँ-बाप के हिस्से में ही आते हैं?
मेरी आप सभी से गुज़ारिश (Conclusion)
दोस्तों, यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। माँ-बाप भगवान का रूप होते हैं, और उन्हें इस हाल में छोड़ देना इंसानियत के खिलाफ है।
इस विषय पर आपकी क्या राय है? आपके आस-पास अगर ऐसा कुछ होता है, तो आप उसे कैसे देखते हैं? प्लीज कमेंट करके मुझे ज़रूर बताएं, क्योंकि आपकी राय इस समाज को बदलने में मदद कर सकती है।

Ek din subko budha hona h fir bhi esa karte h
Ha ji bilkul
♥️♥️♥️🙏🙏🙏