मम्मी-पापा की जीवन यात्रा (भाग 8): जब सपनों की कुर्बानी देकर संघर्ष से संवारी ‘हमारी दुनिया’

नमस्कार दोस्तों, ‘ओम सूर्य देवाय नमः’। ‘हमारी दुनिया’ (humariduniya.in) में आप सभी का एक बार फिर से बहुत-बहुत स्वागत है।

अपनी खास सीरीज़ “मम्मी-पापा की जीवन यात्रा” के भाग 7 में हमने आपको बताया था कि किस तरह संयुक्त परिवार का बंटवारा हो गया था। उस मुश्किल घड़ी में बूढ़ी दादी और छोटी दीदी के साथ हमारे मम्मी-पापा ने अपने जीवन की एक बिल्कुल नई और अनजान यात्रा शुरू की थी। आज भाग 8 में हम उस संघर्ष को और करीब से जानेंगे।

🚜 बिना अनुभव के खेती की शुरुआत

बंटवारे के बाद जब कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब दादी जी के कहने पर पापा ने फार्मिंग यानी खेती करने का फैसला लिया। वैसे तो पापा को खेती का पहले से कोई खास अनुभव नहीं था, पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने चौथे नंबर के ताऊजी की थोड़ी-थोड़ी मदद और सलाह लेकर खेतों में पसीना बहाना शुरू कर दिया।

दूसरी तरफ, मम्मी घर की पूरी जिम्मेदारी संभालने की कोशिश में जुट गईं। धीरे-धीरे हालात थोड़े काबू में आने ही लगे थे। वैसे इस मुश्किल दौर में श्याम मामाजी, बुआजी और नानाजी ने हमसे जितनी हो सकी उतनी आर्थिक और मानसिक मदद की। पर सच यही है दोस्तों, कि किसी और की मदद से कभी हमेशा के लिए घर नहीं चला करते। अपनी गृहस्थी खुद ही संभालनी पड़ती है।

💔 जब टूटना पड़ा अपना सबसे बड़ा सपना (दिल्ली पुलिस में सिलेक्शन)

इसी कड़े संघर्ष के बीच एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई। मम्मी का दिल्ली पुलिस में सिलेक्शन हो गया था! पूरे परिवार में एक उम्मीद की किरण जागी थी। पर जैसा कि आप सब जानते हैं, उस दौर में बिना कुछ ‘दिए-लिए’ यानी रिश्वत या सिफारिश के काम नहीं होते थे।

उस समय हमारे पापा के पास देने के लिए बिल्कुल भी पैसे नहीं थे। नानाजी भी उस वक्त मदद नहीं कर पाए, क्योंकि मामाजी की पढ़ाई का खर्च चल रहा था और उनके पास भी तंगी थी। नतीजा यह हुआ कि पैसों की कमी के कारण मम्मी का वह सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका हाथ से चला गया। वह पल पूरे परिवार के लिए बेहद निराशाजनक था।

🌧️ टूटी छत और मंदिर में गुजरी रातें

उन दिनों हमारे घर के हालात वाकई बहुत खराब थे। रहने के नाम पर सिर्फ 2 कमरे थे और, उसकी छत इतनी कमजोर थी कि बारिश में वहां से पानी टपकता था। जब भी रात को तेज़ बारिश शुरू होती, तो घर के अंदर पानी भर जाता था। घेर में खाली प्लॉट था कोई कमरा नहीं था इसलिए पापा मंदिर में बैठकर पूरी-पूरी रात गुजारते थे।

🌸 संघर्ष के बीच आया एक नया सवेरा (आंगनवाड़ी टीचर की नौकरी)

कहते हैं न कि सच्ची मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और हर अंधेरी रात के बाद सवेरा होता है। कुछ समय बाद मम्मी का सिलेक्शन एक आंगनवाड़ी टीचर के रूप में हो गया। ठीक उसी दौरान मेरा जन्म हुआ।

जब मैं सिर्फ 9 महीने की छोटी सी बच्ची थी, तब मम्मी को अपनी जॉब की ट्रेनिंग पर जाना पड़ा। नौकरी बचाना भी जरूरी था, इसलिए मम्मी भारी मन से ट्रेनिंग पर गईं। उस दौरान मेरी बूढ़ी दादी और बुआ ने मिलकर मेरी परवरिश की और मुझे संभाला। वहीं मेरी बड़ी दीदी उस समय नानाजी के पास रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थीं।

🥛 दिन में नौकरी, रात को आटा चक्की का संघर्ष

अब समय के साथ पापा भी खेती के काम को अच्छी तरह समझने और संभालने लगे थे। मम्मी दिनभर अपनी नौकरी करतीं, घर का सारा काम संभालतीं और फिर थकने के बाद भी रात को हम बहनों को खुद पढ़ाती थीं ताकि हमारा भविष्य खराब न हो।

पापा ने खेती के साथ-साथ अब गाय और भैंस भी पालना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे पाई-पाई जोड़कर घेर में दो कमरों का निर्माण कराया गया। ठंड के दिनों में एक कमरे के अंदर गाय-भैंसों को बांधा जाता था, ताकि उन्हें ठंड न लगे। वहीं दूसरे कमरे में पापा ने एक आटा चक्की लगा ली थी। दिनभर खेतों में काम करते और रात-रात भर उठकर वह आटा चक्की चलाते थे ताकि चार पैसे और कमाए जा सकें।

दोनों की जिंदगी में संघर्ष बहुत बड़ा था, पर दोनों में से किसी ने भी कभी हार मानना नहीं सीखा था। उनकी इसी जिद के आगे धीरे-धीरे ही सही, पर हालात अब सुधरने लगे थे।


आज की सीख (The Bottom Line)

तो दोस्तों, आज के इस भाग 8 में हमने देखा कि जिंदगी हमेशा वैसी नहीं होती जैसा हम सोचते हैं। कभी-कभी इंसान हालातों के आगे इतना मजबूर हो जाता है कि उसे अपने सबसे बड़े सपनों की कुर्बानी देनी पड़ती है, जैसी मेरी मम्मी और पापा ने दे दी। लेकिन सपनों के टूटने के बाद भी जो इंसान कर्म करना नहीं छोड़ता, वह एक दिन अपनी दुनिया खुद संवार लेता है।

‘मम्मी-पापा की जीवन यात्रा’ का अगला भाग (भाग 9) जल्द ही वेबसाइट पर आएगा, जिसमें हम जानेंगे कि इसके आगे उनकी जिंदगी ने क्या मोड़ लिया।

आपसे एक छोटा सा सवाल:
क्या आपके माता-पिता ने भी आपको पढ़ाने या आगे बढ़ाने के लिए अपने किसी सपने की कुर्बानी दी है? कमेंट बॉक्स में अपनी कहानी या उनके प्रति सम्मान में दो शब्द ज़रूर लिखें। आपके कमेंट्स से हमें बहुत प्रेरणा मिलती है।

इस पोस्ट को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करना न भूलें। धन्यवाद!

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