हेलो दोस्तों, ओम नारायण नमः। स्वागत है आपका ‘हमारी दुनिया‘ में।
हमारी इस खूबसूरत और हरी-भरी दुनिया में ईश्वर ने कई अनोखे और प्यारे जीव-जंतु बनाए हैं। कुछ जीव ऐसे होते हैं जिन्हें देखकर ही मन खुश हो जाता है और चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। एक ऐसा ही नन्हा, चुलबुला और बेहद प्यारा जीव है—गिलहरी। आप चाहे गाँव में रहते हों या शहर में, अपने आसपास पेड़ों पर या छतों पर फुदकती हुई गिलहरी आपने ज़रूर देखी होगी। आज ‘हमारी दुनिया’ में हम इसी नन्ही और प्यारी गिलहरी के बारे में बात करेंगे।
मेरे घर के पेड़ों पर गिलहरियों की महफ़िल
मैं बहुत भाग्यशाली हूँ कि मेरे घर के आंगन में प्रकृति की असीम कृपा है। हमारे घर पर जामुन, अमरूद, अनार और पीपल के बहुत सुंदर पेड़ लगे हुए हैं। इन पेड़ों की वजह से हमारे यहाँ बहुत सारी गिलहरियाँ आती हैं और दिनभर खूब एन्जॉय करती हैं। उन्हें एक डाली से दूसरी डाली पर दौड़ते देखना, फलों को कुतरना और उछल-कूद करना देखना मेरे दिन की सबसे खूबसूरत शुरुआत होती है।
छोटी, क्यूट पर बेहद होशियार
गिलहरी आकार में इतनी छोटी और क्यूट होती है कि मन करता है उसे गोद में उठा लें। लेकिन ये जितनी मासूम दिखती हैं, उतनी ही होशियार और सतर्क भी होती हैं। ये आपके पास तो आ जाएँगी, लेकिन कभी आपके हाथ में नहीं आएँगी। जैसे ही आप इन्हें छूने की कोशिश करेंगे, ये बिजली की फुर्ती से पेड़ पर चढ़ जाती हैं। खान-पान के मामले में ये बहुत सीधी होती हैं; छोटे-छोटे अनाज, फल, सब्ज़ियाँ—ये सब कुछ बड़े चाव से खा लेती हैं। गाँव के शांत माहौल और पेड़ों के बीच तो इन्हें आसानी से सब कुछ मिल जाता है, लेकिन कंक्रीट के बड़े-बड़े शहरों में अब इनके लिए भोजन और पानी तलाशना बहुत मुश्किल हो गया है।
बेजुबानों का सहारा: हमारी एक छोटी सी कोशिश
जैसा कि मैंने अपनी पिछली पोस्ट में भी आपसे बात की थी, ये छोटे-छोटे बेजुबान जानवर और पक्षी हमारी भाषा नहीं समझते, लेकिन प्यार की भाषा बहुत अच्छे से जानते हैं। जब हम अपनी छत या बालकनी में इनके लिए थोड़ा सा दाना या पानी रखते हैं, तो ये उसे पाकर बहुत खुश हो जाते हैं। इस भीषण और चिलचिलाती गर्मी में, आपका दिया हुआ वह एक कटोरी पानी इन नन्हे जीवों को जीवित रहने (Survive करने) में बहुत बड़ी मदद करता है।
मेरी आप सभी से एक आत्मीय गुज़ारिश (Appeal)
दोस्तों, प्रकृति का संतुलन इन छोटे जीवों से ही बना हुआ है। गिलहरियाँ तो अनजाने में पेड़ों के बीज यहाँ-वहाँ फैलाकर नए पौधे उगाने में भी मदद करती हैं। मेरी आप सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि प्लीज अपनी छत पर, घर के बाहर, बालकनी में या किसी भी पेड़ के पास थोड़ा सा साफ़ पानी ज़रूर रखें और हो सके तो कुछ अनाज के दाने या फलों के टुकड़े भी रख दें।
याद रखिए, हमारी एक छोटी सी कोशिश और हमारा थोड़ा सा समय किसी मासूम बेजुबान की जान बचा सकता है। आइए, ‘हमारी दुनिया’ को इन नन्हे फरिश्तों के लिए और भी सुंदर बनाएँ।
धन्यवाद! ओम नारायण नमः।

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