नमस्कार दोस्तों, ओम गणेशाय नमः। स्वागत है आपका ‘हमारी दुनिया’ में।
आज ‘हमारी दुनिया’ में हम बात करेंगे बेटियों के एक और ऐसे अधिकार की, जिस पर आज समाज की संकुचित सोच ने बंदिशें लगाने की कोशिश की है। यह विषय है—बेटियों के विवाह का संघर्ष और समाज का बदला हुआ रवैया।
रिश्तों की बदलती परिभाषा और ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा
एक दौर था जब शादी-ब्याह के रिश्ते सगे-संबंधी और दोस्त मिलकर बड़े मान-सम्मान से तय कराते थे। लेकिन आज का कड़वा सच यह है कि मुश्किल वक्त में न तो दोस्त काम आते हैं और न ही रिश्तेदार। थक-हारकर लोग ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट्स का रुख करते हैं। मगर अफ़सोस, आज इंटरनेट पर भी मासूम परिवारों को ठगने के लिए स्कैमर्स जाल बिछाकर बैठे हैं, जो झूठ बोलकर किसी की भावना और भरोसे का सौदा कर देते हैं।
दहेज का दंश और रिश्तेदारों की बेरुखी
सवाल यह उठता है कि यदि कोई माता-पिता मध्यमवर्गीय हैं और उनके पास समाज की मांग के अनुसार भारी दहेज देने की क्षमता नहीं है, तो क्या उन्हें अपनी बेटी के लिए अच्छे वर का सपना देखने का अधिकार नहीं है? अक्सर देखा जाता है कि ऐसे परिवारों से लोग दूरियां बना लेते हैं। पूछने पर टका सा जवाब मिलता है—’आपकी बेटी के लायक कोई रिश्ता नहीं है।’ यह सोच बेटियों के हुनर और उनके वजूद का अपमान है।
भोले बाबा का न्याय और सपनों का अधिकार
जो लोग यह सोचते हैं कि एक मिडिल क्लास बेटी का भविष्य कभी उज्ज्वल नहीं हो सकता, वे शायद भूल जाते हैं कि इस मतलबी दुनिया से ऊपर एक ब्रह्मांडीय शक्ति है—हमारे भोले बाबा। भोलेनाथ के दरबार में अमीर-गरीब का कोई भेदभाव नहीं है। उन्होंने हर बेटी को सम्मान से जीने और अपने सपनों की उड़ान भरने का बराबर अधिकार दिया है।
मेरी कलम से (निष्कर्ष और संदेश):
मैं अपनी दुनिया के माध्यम से सभी बेटियों और उनके माता-पिता से यही कहना चाहती हूँ कि किसी की भी नकारात्मक बातों को दिल से लगाकर हताश न हों। समाज या रिश्तेदारों के भरोसे बैठने के बजाय खुद पर और उस परमेश्वर पर भरोसा रखें। हौसले के साथ आगे बढ़ें, क्योंकि जब दुनिया रास्ता बंद करती है, तो भोले बाबा नया रास्ता खोल देते हैं।

Bilkul theek baat h sapne dekhne ka adhikar sabko h
Haji bilkul
Yes yes