नमस्कार दोस्तों!
आप सभी का स्वागत है हमारी दुनिया ‘मम्मी पापा की जीवन यात्रा – हमारे अनकहे हीरो (भाग 2)’ में।
कल भाग 1 में मैंने आपको अपने पापा के बारे में बताया था—उनका जन्म, उनकी पढ़ाई-लिखाई और उनकी फैमिली के बारे में। जैसा कि मैंने वादा किया था कि हमारी दुनिया में वर्ल्ड की बेस्ट लव स्टोरी कॉलेज से शुरू हुई थी, जो आज भी सुपरहिट है। पर मेरे पापा को जानने के बाद, आज इस भाग में मेरी मम्मी को भी थोड़ा समझ लेते हैं।
उत्तर प्रदेश के जिला हापुड़ में एक कस्बा और ब्लॉक है—धौलाना। यहाँ रहते थे मेरे नानाजी श्री बनी सिंह सिसोदिया (जो वर्ल्ड के बेस्ट नानू थे) और मेरी नानीजी शांति देवी। नानीजी को मैंने कभी देखा नहीं, क्योंकि जब मम्मी सिर्फ 12 साल की थीं, तभी नानीजी का निधन हो गया था। पर मम्मी बताती हैं कि वह भी बहुत बेस्ट थीं। नानाजी किसान थे पर स्वभाव से थोड़े ज्यादा ही सीधे-साधे थे, इसलिए नानीजी हमेशा उनके साथ मिलकर सब कुछ संभालती थीं।
उनके परिवार में 6 बच्चे थे—3 लड़के और 3 लड़कियां। सबसे बड़े मामाजी रविंदर सिंह सिसोदिया, फिर मौसी कुसुम, फिर मामाजी नरेंद्र सिंह सिसोदिया, फिर छोटी मौसी निर्मला (पप्पू), फिर मेरी मम्मी ऊषा (गुड्डी) और सबसे छोटे मामाजी राजीव सिसोदिया।
नानाजी और नानीजी ने अपने बच्चों को बहुत मेहनत से पढ़ाया था। फिर अचानक नानीजी के चले जाने के बाद भी नानाजी ने कभी हार नहीं मानी और बच्चों को पढ़ाना-लिखाना जारी रखा। मेरी मम्मी ने बहुत छोटी उम्र से ही घर-परिवार की ज़िम्मेदारियाँ भी देखीं और साथ ही अपनी पढ़ाई भी पूरी की, और वहीं से बी.ए. (B.A.) किया।
मम्मी की इसी पढ़ाई के दौरान, पापा के कॉलेज में ही दोनों की मुलाकात हुई। वहीं से शुरू हुई वर्ल्ड की बेस्ट और सबसे सक्सेसफुल लव स्टोरी, जिसकी लोग आज भी मिसाल देते हैं।
ओके दोस्तों! आज हमारी दुनिया में आपने मेरी प्यारी मम्मी के जीवन और उनके परिवार के बारे में जाना है। अगली पोस्ट (भाग 3) में हम मम्मा-पापा की इसी सुपरहिट लव स्टोरी के बारे में विस्तार से जानेंगे। कल फिर मिलेंगे! राधे-राधे जी! 🙏✨
परफेक्ट कपल! ❤️
😍
👍
Superb story ❤️❤️
Thanks