नमस्कार दोस्तों! आप सभी का स्वागत है हमारी दुनिया ‘मम्मी पापा की जीवन यात्रा – हमारे अनकहे हीरो (भाग 3)’ में।
कल भाग 2 में मैंने आपको मेरी प्यारी मम्मी के परिवार, धौलाना (हापुड़) की यादों और उनके बचपन के संघर्षों के बारे में बताया था। कैसे उन्होंने छोटी उम्र में ज़िम्मेदारियाँ संभालते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की और बी.ए. (B.A.) किया।
जैसा कि मैंने आपसे वादा किया था, आज इस भाग में हम बात करेंगे उस अध्याय की जिसकी लोग आज भी मिसाल देते हैं—यानी मम्मी और पापा की वो ‘वर्ल्ड बेस्ट और सुपरहिट लव स्टोरी’!
यह कहानी शुरू होती है पिलखुवा के मशहूर ‘राणा डिग्री कॉलेज’ (Rana Degree College, Pilkhuwa) से, जहाँ मम्मी और पापा दोनों एक साथ पढ़ रहे थे। पापा अपनी पढ़ाई और अपने सपनों में मसरूफ थे, और मम्मी अपनी सादगी और ज़िम्मेदारियों के साथ कॉलेज आ रही थीं। कहते हैं न कि जब दो सच्चे दिलों का मिलना तय होता है, तो कायनात खुद रास्ते बना देती है। इसी कॉलेज के कैंपस में दोनों की पहली मुलाकात हुई।
उस दौर का प्यार आज के जैसा नहीं था, जहाँ सब कुछ बहुत जल्दी बदल जाता है। उनके बीच एक ठहराव था, आँखों ही आँखों में बातें थीं और एक-दूसरे के प्रति बेहद सम्मान था। राणा डिग्री कॉलेज की वो क्लास, कॉलेज के गलियारे, नोट्स का लेन-देन और एक-दूसरे को देखना कब एक गहरे और अटूट रिश्ते में बदल गया, उन्हें खुद भी पता नहीं चला।
दोनों का स्वभाव भले ही अलग था—एक तरफ पापा का अपना स्वाभिमान और कड़क मिजाज, तो दूसरी तरफ मम्मी की असीम सादगी और समझदारी—लेकिन यही वो चीज़ें थीं जो उन्हें एक-दूसरे के लिए परफेक्ट बनाती थीं। उन्होंने सिर्फ कॉलेज के दिनों में सपने नहीं देखे, बल्कि उन सपनों को सच करने का एक पक्का इरादा भी किया। यही वजह है कि उनकी यह लव स्टोरी इतनी सफल रही कि लोग आज भी इसकी मिसालें देते हैं।
ओके दोस्तों! आज हमारी दुनिया में आपने राणा डिग्री कॉलेज से शुरू हुई मम्मी-पापा की इस खूबसूरत लव स्टोरी की शुरुआत को जाना है। अगली पोस्ट (भाग 4) में हम जानेंगे कि कॉलेज के बाद इस रिश्ते को शादी की मंज़िल तक पहुँचाने में उन्हें किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा और कैसे उन्होंने अपने प्यार को जीत दिलाई।
कल फिर मिलेंगे एक नए और दिलचस्प भाग के साथ! तब तक के लिए आप सभी को प्यार भरा राधे-राधे जी! 🙏✨
अद्भुत सफर
🥳
❤️
🙏
Very sweet story 💓
Thanks