मम्मी-पापा की जीवन यात्रा: हमारे अनकहे हीरो (भाग-1)

नमस्कार दोस्तों!

आप लोगों का स्वागत है हमारी दुनिया मे

आज हम बात करेंगे मम्मी-पापा की। हम लोग हमेशा दूसरे लोगों के मम्मी-पापा की बातें करते हैं कि—”उनके मम्मी-पापा ऐसे हैं”, “उन्होंने उनके लिए यह किया, वो किया” वगैरह-वगैरह। पर कभी हम अपने मम्मी-पापा के बारे में खुलकर बात नहीं करते कि उन्होंने हमारे लिए क्या किया है।

आज मैं आपको अपने मम्मी-पापा के बारे में बताऊंगी। जितना मुझे याद है और जितना मेरी दादी व बुआ जी ने मुझे बताया है, वो सब आज मैं आपके साथ शेयर करूंगी। तो चलिए शुरू करते हैं मेरे मम्मी-पापा की जीवन यात्रा!

मेरे पापा: मेरे हीरो, मेरी जान

दोस्तों, पहले मैं आपको अपने पापा के बारे में बताती हूं। मेरे पापा मेरे हीरो हैं और मेरी लाइफ का सबसे इम्पोर्टेन्ट हिस्सा हैं, जिनके बिना मेरी जिंदगी बिल्कुल अधूरी है। उनके लिए क्या बोलूं, मेरे पास शब्द भी कम हैं।

मेरा एक छोटा सा गांव है—अमीरपुर बढ़ायला (जिला गाजियाबाद, यू.पी.)। मेरे दादा जी का नाम ठाकुर गुलाब सिंह तोमर था और मेरी प्यारी सी दादी मां विद्या देवी थीं, जो सच में वर्ल्ड की बेस्ट दादी थीं। उनके 5 बेटे और 1 बेटी थीं।

  • सबसे बड़े: ओमप्रकाश सिंह तोमर
  • फिर: विजयपाल सिंह तोमर
  • फिर: राजपाल सिंह तोमर
  • फिर मेरी बुआ जी: उपदेश (वह भी वर्ल्ड की बेस्ट बुआ जी हैं)
  • उनके बाद: कृपाल सिंह तोमर
  • और फिर सबसे छोटे: मेरे पापा हरिओम सिंह तोमर

पापा का बचपन और पढ़ाई का सफर

आपको पता है, मेरे पापा का जन्म मेरे सबसे छोटे ताऊ जी के 7 साल बाद हुआ था, इसलिए वह मेरी दादी के सबसे लाडले थे। मेरे दादा जी किसान थे, फिर भी उन्होंने अपने बेटों को पढ़ाया। लेकिन मेरी बुआ जी नहीं पढ़ पाईं, क्योंकि उस समय स्कूल गांव से बहुत ज्यादा दूर था और तब लड़कियों को घर से इतनी दूर भेजने का रिवाज नहीं था। पर हमारी बुआ जी को घर का सारा काम आता है—सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, वह हर चीज में परफेक्ट हैं।

मेरे पापा भी स्कूल कभी पैदल तो कभी साइकिल से जाते थे। उन्होंने बहुत मेहनत से M.A. (Post Graduation) किया।

यहीं से शुरू हुई एक प्रेम कहानी…

उसी कॉलेज में पापा की मुलाकात मम्मी से हुई। साथ में पढ़ते-पढ़ते दोनों को प्यार हो गया। हमारी दुनिया में ‘वर्ल्ड की बेस्ट लव स्टोरी’ इसी कॉलेज से शुरू हुई थी, जो आज भी सुपरहिट है!

मम्मी के बारे में मैं आपको अपनी नेक्स्ट पोस्ट में बताऊंगी… तब तक के लिए जुड़े रहिए!


6 thoughts on “मम्मी-पापा की जीवन यात्रा: हमारे अनकहे हीरो (भाग-1)”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top