ओम शं शनैश्चराय नमः।
नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका आपकी अपनी वेबसाइट ‘हमारी दुनिया’ (humariduniya.in) में।
‘स्वाभिमान’ सीरीज़ के पिछले भागों में आपने मेरी बड़ी दीदी बुलबुल, छोटी बहन ज्योति, सबसे छोटी बहन शिखा और हमारे इकलौते भाई अभय की जीवन यात्रा के बारे में जाना। आप सब ने मेरे पूरे परिवार को इतना प्यार दिया, इसके लिए आप सभी का दिल से धन्यवाद। जब आपने मेरे सभी भाई-बहनों के बारे में इतना कुछ जान लिया है, तो मुझे लगा कि थोड़ा सा आपको अपने बारे में भी बताना चाहिए, तभी तो आप हम पाँचों भाई-बहनों को और अच्छे से समझ पाएंगे!
तो चलिए दोस्तों, आज बात करते हैं मेरे यानी मनीषा के बारे में।
❄️ 24 अक्टूबर का जन्म और बचपन की वो मस्तियाँ
मैं अपने भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हूँ। इसका मतलब मुझसे बड़ी सिर्फ मेरी बुलबुल दीदी हैं, और मुझसे छोटे दो बहनें और एक भाई हैं। मेरा जन्म 24 अक्टूबर को हुआ था, शायद यही वजह है कि मुझे गुलाबी सर्दियों का मौसम बहुत ज़्यादा पसंद है, मैं सर्दियों की थोड़ी दीवानी सी हूँ।
चूँकि घर में बुलबुल दीदी सबसे बड़ी थीं, इसलिए बचपन में ज़िम्मेदारियों का सारा बोझ उन्हीं के कंधों पर था। मैं दूसरे नंबर पर थी, तो मुझ पर कोई ख़ास दबाव नहीं था। यही वजह रही कि मेरा बचपन बिना किसी फिक्र के, बेहद हंसी-खुशी और खिलखिलाते हुए बीता।
🤝 दीदी की शादी और अचानक बड़ा हो जाना
कहते हैं ना कि वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। जब बड़ी दीदी की शादी हो गई, तो घर में अचानक एक खालीपन आ गया। दीदी के जाते ही मुझे एक झटके में बड़ा होना पड़ा। जो ज़िम्मेदारियाँ कल तक दीदी संभालती थीं, अब उन्हें समझने की बारी मेरी थी।
मैंने मम्मी और पापा के साथ घर की थोड़ी-बहुत ज़िम्मेदारियाँ बांटना शुरू किया। सच कहूँ तो मैं अपने परिवार के लिए कभी बहुत ज़्यादा कुछ तो नहीं कर पाई, लेकिन जितनी भी मेरी क्षमता थी, मैंने पूरे मन से सबके लिए कोशिश की और आज भी कर रही हूँ।
😇 सादा जीवन और अपनों की खुशी का सपना
मैं बहुत ज़्यादा मॉडर्न (आधुनिक) विचारों की नहीं हूँ, बहुत सादगी से जीना पसंद करती हूँ। न ही मेरी ज़िंदगी से बहुत बड़ी-बड़ी ख्वाहिशें हैं और न ही मुझे बहुत कुछ चाहिए। मेरा बस एक ही छोटा सा सपना है—“मेरे साथ जुड़ा हुआ हर एक इंसान अपने सपनों को पूरा कर सके, और मैं उस सफ़र में उनकी थोड़ी सी मदद कर सकूँ।”
ऐसा इसलिए क्योंकि जब उन सब के चेहरों पर वो सच्ची और प्यारी सी खुशी आएगी ना, बस उसी खुशी में मेरी पूरी दुनिया बसी होगी। मेरी वजह से कभी भी किसी का चेहरा मुरझाए नहीं, बस भोलेनाथ से मेरी यही प्रार्थना है।
ओम हनुमते नमः।


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