स्वाभिमान (भाग 6): हमारा अनमोल ‘लिटिल प्रिंस’ भाई अभय—जिसमें बसती है हम चारों बहनों की जान

ओम शं शनैश्चराय नमः।

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका आपकी अपनी वेबसाइट ‘हमारी दुनिया’ (humariduniya.in) में।

हमारी बेहद पसंदीदा सीरीज़ ‘स्वाभिमान’ के भाग-6 में आज मैं बात करने जा रही हूँ हमारी पूरी दुनिया के ‘प्रिंस’ की। वो प्रिंस, जो सचमुच हम सबकी दुनिया है, हमारे दिल की धड़कन है और जिसके सिर्फ नाम मात्र से हम सबके चेहरों पर एक प्यारी सी मुस्कान आ जाती है। वो है हमारा छोटा, प्यारा भाई अभय। भगवान का दिया हुआ हमारे जीवन का सबसे कीमती तोहफा! इसी वजह से गाँव में सब उसे प्यार से ‘अनमोल’ नाम से बुलाते हैं, और सच में वो हमारे लिए अनमोल ही है। अभय उसका स्कूल और कॉलेज का नाम है।


🎉 3 सितंबर: हमारी दुनिया का सबसे बड़ा दिन

हमारा भाई अभय, जिसके लिए हम चारों बहनों ने भगवान से बहुत प्रार्थनाएँ की थीं। आखिरकार हमारी दुआएँ कुबूल हुईं और 3 सितंबर को वो हमारी दुनिया में आया। हमारे लिए वो दिन ज़िन्दगी का सबसे बड़ा और सबसे खूबसूरत दिन था, क्योंकि उसी दिन हम चारों बहनें भी एक भाई की बहनें बनी थीं।

बचपन में वो इतना मासूम और क्यूट था कि गाँव में कोई भी उसे एक बार देख लेता, तो बिना गोद में लिए रह ही नहीं पाता था। वो सबका बहुत लाडला था। मुझे आज भी याद है, जब भी उसे नहला-धुलाकर और तैयार करके घर से बाहर लाते थे, तो ताऊ जी प्यार से उसके कपड़े उतारकर उसे मिट्टी में बिठा देते थे! ऐसा इसलिए क्योंकि उसे पानी और मिट्टी में खेलना बेहद पसंद था। गाँव का कोई भी इंसान उसे खिलाने के लिए हमारे घर से अपने साथ ले जाता था।


🎒 पढ़ाई के लिए बचपन में ही घर से दूरी

इन्हीं छोटी-छोटी प्यारी शरारतों के बीच हमारा अनमोल ढाई साल का हो गया और अब उसके स्कूल जाने का समय आ चुका था। वैसे तो मम्मी एक प्री-स्कूल टीचर थीं, इसलिए वो पहले से ही मम्मी के साथ स्कूल जाता था, पर अब उसे सचमुच अपनी स्कूली पढ़ाई शुरू करनी थी।

गाँव में अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल नहीं थे। इसलिए अभय और शिखा की अच्छी पढ़ाई के लिए, और साथ ही बड़ी दीदी के कॉलेज और मेरी पढ़ाई के लिए हम चारों भाई-बहन गाँव छोड़कर मोदीनगर आ गए। हमारा इतना छोटा और लाडला भाई सिर्फ पढ़ाई की खातिर इतनी कम उम्र में अपने माता-पिता से दूर हो गया। लेकिन हम चारों बहनों ने उसे कभी मम्मी की कमी महसूस नहीं होने दी। पापा रोज़ हमसे मिलने मोदीनगर आ जाते थे, मम्मी हर संडे को आ जाती थीं और छुट्टियों में हम सब गाँव चले जाते थे।

हमारा भाई पढ़ाई में भी बहुत होशियार था, वो स्कूल में हमेशा फर्स्ट (First) आता था। समय बीतता गया, दीदी की शादी के बाद ज्योति भी हमारे साथ रहने आ गई, बुआ जी भी थीं, और बस ऐसे ही हंसते-खेलते हमारा भाई कब बड़ा हो गया, पता ही नहीं चला।


💻 कंप्यूटर साइंस इंजीनियर बनने का सपना और जालंधर का सफ़र

देखते ही देखते अभय ने अपनी 12वीं कक्षा पास कर ली और अब कॉलेज जाने की बारी थी। हमने उस पर कभी कोई दबाव नहीं बनाया कि उसे आगे क्या करना है। उसने खुद तय किया कि उसे कंप्यूटर साइंस से B.Tech करना है, और वो भी बाहर किसी अच्छे कॉलेज से।

हम बहनें तो बिल्कुल नहीं चाहती थीं कि हमारा भाई हमसे दूर कहीं बाहर जाए, पर उसके सुनहरे भविष्य के लिए हम सब ने भारी मन से उसके इस फैसले का साथ दिया। उसने एंट्रेंस एग्जाम क्लियर किया और पढ़ाई के लिए जालंधर (पंजाब) चला गया। आज जालंधर में उसके 3 साल पूरे हो चुके हैं और बस 1 साल की पढ़ाई और बची है। यह समय भी कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला; क्योंकि जब भी फेस्टिवल्स होते, छुट्टियां होतीं या घर में कोई फंक्शन होता, वो तुरंत घर आ जाता था।


💞 आज भी वही मासूमियत और हमारे घर का ‘ऑल-इन-वन’ सुपरस्टार

इतना समय बीत जाने के बाद भी आज ऐसा लगता है जैसे कल ही की तो बात हो जब वो छोटा सा हमारी गोद में हंसता-खेलता था। वक्त इतनी जल्दी बदल गया, पर एक चीज़ आज भी बिल्कुल वैसी ही है—वो है हमारे भाई की मासूमियत और उसका बचपना। उसे देखकर कभी महसूस ही नहीं होता कि वो इतना बड़ा हो गया है।

आज वो हमारे घर का इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, ड्राइवर और एंटरटेनर यानी सब कुछ बन गया है! घर का कोई भी काम हो, अभय चुटकियों में संभाल लेता है। वो हमारे पूरे परिवार को एक धागे में पिरोकर रखने वाली वो मज़बूत कड़ी है, जिसके होते हुए हमारी दुनिया कभी बिखर नहीं सकती। वो जितना समझदार है, उतना ही नटखट भी है। हम सब उसको बहुत प्यार करते है।


💬 अपनी यादें कमेंट में बताएं

दोस्तों, एक इकलौता भाई अपनी बहनों के लिए सिर्फ भाई नहीं, बल्कि उनका रक्षक और मान होता है। अगर आपके पास भी अपने भाई-बहन के रिश्ते की कोई ऐसी ही खट्टी-मीठी या प्यारी सी याद हो, तो प्लीज नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर हमारे साथ ज़रूर शेयर करें! तब तक के लिए धन्यवाद।

ओम हनुमते नमः।


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