स्वाभिमान (भाग 4): मेरी छोटी बहन ज्योति—शरारती, ज़िद्दी और दिल की साफ़!

ओम शं शनैश्चराय नमः।

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका आपकी अपनी वेबसाइट ‘हमारी दुनिया’ (humariduniya.in) में।

हमारी ख़ास सीरीज़ ‘स्वाभिमान’ के पिछले भाग (भाग-3) में मैंने आपको अपनी बड़ी बहन बुलबुल (वंदना) दीदी के संघर्षों के बारे में बताया था। आज ‘स्वाभिमान’ के भाग-4 में, मैं बात करने जा रही हूँ भाई-बहन के एक और अनोखे रिश्ते की। आज की कहानी है मेरी छोटी बहन ज्योति की।


👧 बचपन की वो शरारतें और लड़कों जैसा अंदाज़

ज्योति मुझसे दो साल छोटी है। बचपन में जब अभय और शिखा का जन्म नहीं हुआ था, तब हम तीन बहनें ही थीं। ज्योति सबसे छोटी होने के कारण घर में सबकी लाडली थी, और शायद इसीलिए वो बेहद ज़िद्दी और शरारती भी थी। बचपन में उसका लुक और अंदाज़ बिल्कुल लड़कों जैसा था, लड़कियों जैसी कोई बात ही नहीं थी उसमें।

हम दोनों बहनें कम और पक्के दोस्त ज़्यादा थे। हमारा उठना-बैठना, खाना-पीना और खेलना-कूदना हमेशा साथ में ही होता था। सच कहूँ तो हम दोनों को कभी किसी बाहरी दोस्त की ज़रूरत ही महसूस नहीं हुई, क्योंकि हमें एक-दूसरे से ही फ़ुर्सत नहीं मिलती थी। हाँ, हमारे बीच ज़बरदस्त लड़ाइयाँ भी होती थीं और फिर मम्मी से हमारी अच्छी-खासी पिटाई भी होती थी! लेकिन मज़े की बात देखिए, पिटाई के कुछ ही मिनटों बाद हम फिर से हंसते-खेलते एक हो जाते थे।


🏡 ज़िम्मेदारियाँ और दूरी का सफ़र

वक़्त बदला और पढ़ाई के सिलसिले में मुझे, अभय, शिखा को दीदी के साथ मोदीनगर (Modinagar) रहने जाना पड़ा। उस वक़्त ज्योति पीछे गाँव में मम्मी-पापा के साथ ही रह गई थी। उसने वहीं रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की और अकेले ही घर के कामों में मम्मी-पापा का हाथ बँटाया। उसने भी अपने हिस्से का पूरा संघर्ष किया।

बाद में, जब कॉलेज की पढ़ाई का समय आया, तो ज्योति भी हमारे पास मोदीनगर आ गई। यहाँ उसने अपना कॉलेज पूरा किया और कुछ समय तक मेरे साथ जॉब (Job) भी की। फिर एक समय ऐसा आया जब मैं शादी नहीं करना चाहती थी, तो परिवार की रज़ामंदी से ज्योति की शादी पहले हो गई।


👩‍👧‍👦 दो बच्चों की माँ, पर आज भी वही पुरानी ज्योति

आज ज्योति अपने ससुराल में बहुत खुश है। वह बहुत ही स्वादिष्ट खाना बनाती है और अपने पूरे घर को बहुत अच्छे से संभालती है। उसके दो बहुत ही प्यारे और क्यूट बच्चे हैं—एक बेटा क्रियांश (Kriyansh) जो अब स्कूल जाने लगा है, और एक छोटी बेटी पार्थवी (Parthvi)। दोनों बच्चे बिल्कुल अपनी मम्मी पर गए हैं—उतने ही शरारती और नटखट!

दो बच्चों की माँ बनने के बाद भी ज्योति आज तक अंदर से बिल्कुल नहीं बदली। वह आज भी वैसी ही शरारती और ज़िद्दी है। ज़रा सी बात पर नाराज़ हो जाना और फिर पल भर में मान जाना—उसका यह अंदाज़ आज भी वैसा ही है।


💞 हमारी दुनिया के ५ अनमोल रत्न

हमारी दुनिया में हम पाँचों भाई-बहन सचमुच एक-दूसरे से बिल्कुल अलग और अनोखे हैं। हर किसी की अपनी एक ख़ासियत है। अगली पोस्ट में मैं आपको अपनी दूसरी बहन (शिखा) की ज़िंदगी के कुछ ऐसे ही खूबसूरत पलों से रूबरू कराऊँगी।

ओम हनुमते नमः।


💬 अपनी यादें साझा करें

दोस्तों, छोटी बहनें घर की रौनक होती हैं। अगर आपकी भी अपनी छोटी बहन से जुड़ी कोई ऐसी ही खट्टी-मीठी या शरारत भरी याद हो, तो नीचे कमेंट बॉक्स में हमारे साथ ज़रूर शेयर करें। तब तक के लिए धन्यवाद!


3 thoughts on “स्वाभिमान (भाग 4): मेरी छोटी बहन ज्योति—शरारती, ज़िद्दी और दिल की साफ़!”

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