नमस्कार दोस्तों, ‘हमारी दुनिया’ (humariduniya.in) में आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है। ओम नमः शिवाय। ✨
सोमवार के हमारे खास शेड्यूल ‘हमारे बुजुर्ग‘ के तहत आज मैं आपके सामने एक ऐसी बात रखने जा रही हूँ, जो शायद हम सबने अपने घरों में कभी न कभी ज़रूर देखी या महसूस की होगी।
एक छोटा सा सवाल और हमारा गुस्सा
दोस्तों, मुझे एक चीज़ आज तक समझ नहीं आई कि हम थोड़े बड़े होते ही अपने बुजुर्गों के प्यार को कैसे भूल जाते हैं और उन पर गुस्सा करने लगते हैं? अक्सर ऐसा होता है कि हम घर से बाहर कहीं जा रहे होते हैं, और घर का कोई बुजुर्ग सिर्फ इतना पूछ लेता है— “कहाँ जा रहे हो?“
बस, इतनी सी बात पर हम भड़क जाते हैं। हम उन पर चिल्लाते हुए कहते हैं— “लो! निकलते ही टोक दिया। आप लोग बस चुप नहीं रह सकते क्या? कोई भी काम करने चलो, तो पहले ही टोक देते हैं। पता नहीं क्यों, कुछ समझ नहीं आता आप लोगों को!” और न जाने गुस्से में हम उन्हें क्या-क्या बोल देते हैं।
बच्चों जैसी मासूमियत और खाली आँखें
क्या कभी आपने सोचा है कि उस वक्त उन बुजुर्गों के दिल पर क्या गुज़रती है? अगर हम उस समय एक बार भी उनकी आँखों में झाँककर देख लें या उनके मुरझाए हुए चेहरे को देख लें, तो हमें तुरंत समझ आ जाएगा कि हमने कितनी बड़ी गलती कर दी है।
इतना सब कड़वा सुनने के बाद भी हमारे बुजुर्ग बिल्कुल छोटे बच्चों की तरह मासूम सा चेहरा बना लेते हैं। वे अपनी खाली आँखों से हमें सिर्फ इस उम्मीद में देखते हैं कि शायद उनका बच्चा पलटकर एक बार प्यार से बोल दे— “कोई बात नहीं, कुछ नहीं हुआ।” ठीक वैसे ही, जैसे बचपन में हमारे कोई गलती करने पर वो हमें प्यार से गले लगाकर समझाते थे। बुढ़ापे के इस मोड़ पर वो हमसे भी बस उसी प्यार और धीरज की उम्मीद रखते हैं।
मेरी आप सभी से गुज़ारिश (Conclusion)
क्या बुजुर्गों के साथ ऐसा व्यवहार करना सही है? मेरी नज़रों में तो यह बिल्कुल गलत है, सौ प्रतिशत गलत है। हमारे बुजुर्ग यह सब बिल्कुल भी डिज़र्व (Deserve) नहीं करते। उनका पूछना कोई अंधविश्वास या काम बिगाड़ने की टोक नहीं, बल्कि हमारे प्रति उनकी चिंता और बेपनाह प्यार होता है।
आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या आपके घर में भी कभी ऐसा हुआ है? मुझे कमेंट करके ज़रूर बताएं, क्योंकि आपके विचार किसी की सोच बदल सकते हैं।

ha ji bilkul sahi baat h ghar me bade bujurgo ka saya hona bhut jaruri hota h
very very nice