नमस्कार दोस्तों, आज मेरे मन में आया कि इस निरंतर आगे बढ़ती हमारी दुनिया में बहुत कुछ जरूरी हमसे छूटता जा रहा है। और उस बहुत कुछ में हमारे माता-पिता भी शामिल हैं। हम लोगों को पता भी नहीं चल रहा है, या सब कुछ पता है फिर भी उन्हें अनदेखा कर आगे बढ़ रहे हैं कुछ बेहतर की खोज में।
लेकिन एक सवाल है मेरे मन में कि जिस बेहतर की खोज में हम सब कुछ छोड़ देते हैं, अपने माता-पिता को भी नजरअंदाज कर देते हैं, क्या वो बेहतर हमें मिल पाता है? अगर मुझसे पूछें तो बिल्कुल नहीं मिलता। क्योंकि उसको पाने के लिए हमने दुनिया की सबसे अनमोल चीज को पीछे छोड़ा होता है और वो हैं हमारे मम्मी-पापा।
मम्मी-पापा सिर्फ एक नाम नहीं होता, वो हमारी पूरी दुनिया होते हैं। उनके बिना हमारा अस्तित्व ही नहीं हो सकता था। मम्मी-पापा को भगवान ने भी अपने से ऊपर का दर्जा दिया है। वो भी मम्मी-पापा का प्यार पाने के लिए कभी कृष्ण जी, कभी राम जी और कभी हनुमान जी बनकर धरती पर जन्म लेते हैं और मम्मी-पापा के प्यार का सुख भोगते हैं।
तो अब आप सोचो कि मम्मी-पापा क्या होते हैं, जिनके सामने भगवान भी झुकते हैं। और हम लोग थोड़े से बड़े या कामयाब होते ही उन्हें ऐसे ही छोड़ देते हैं जैसे वो कुछ हैं ही नहीं हमारी दुनिया में। हमारे अस्तित्व को पहचान देते-देते मम्मी-पापा का अस्तित्व ही खत्म हो गया हो, पर ऐसा नहीं होता। मम्मी-पापा हमारी दुनिया रूपी पेड़ की जड़ होते हैं। और जड़ काटने से पेड़ भी कभी हरा-भरा नहीं रह सकता, वो भी सूख जाता है।
तभी तो कहते हैं कि कभी किसी से ये मत पूछो कि वो कितना कामयाब है, बस एक बार उसके माता-पिता का चेहरा गौर से देख लो। उनकी आँखों में खुशी है या खामोशी, आपको पता चल जाएगा कि वो आदमी कितना कामयाब है।
दोस्तों, जिस इंसान के पास छोटा सा घर है, छोटी सी नौकरी और गाड़ी-बंगला कुछ नहीं है, दिन-रात मेहनत करके अपने घर को चला रहा है, पर फिर भी उसके मम्मी-पापा की आंखों में खुशी है और होठों पर मुस्कान, समझ जाना दुनिया में उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता। वो दुनिया की हर चीज को अपने कदमों में झुका सकता है। और जिस इंसान के पास बहुत से नौकर हैं, गाड़ियां हैं, बंगला है, पर फिर भी उसके साथ मम्मी-पापा की आंखों में आंसू हैं, होठ खामोश हैं, तो दुनिया में उससे गरीब कोई नहीं।