आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सब इतने व्यस्त हो गए हैं कि अपने जीवन की नींव—यानी अपने घर के बड़ों (दादा-दादी, नाना-नानी, मम्मी-पापा या बुआ-मामा-मामी) को ही समय देना भूल गए हैं। सच कहिए, क्या आज हम उन्हें अनदेखा (Ignore) नहीं कर रहे? उनके पास बैठकर इधर-उधर की बातें करने का समय क्या हमारे पास नहीं बचा? यहाँ तक कि कुछ लोग तो उनका हाल-चाल तक नहीं पूछते।
क्या हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि जिन लोगों के हाथ पकड़कर हमारी जिंदगी की शुरुआत हुई, आज उन्हीं को पीछे छोड़कर आगे बढ़ गए? और अब मुड़कर देखने का भी समय नहीं है? एक बार ठंडे दिमाग से सोचिए और अपने आप से पूछिए—क्या यह सही है?
शायद हम भूल गए हैं कि जो आज उनका हाल है, वही कल हमारा भी होने वाला है। आज हम उन्हें अनदेखा कर रहे हैं, कल हमें भी कोई अनदेखा करेगा। क्योंकि दुनिया गोल है, आप जैसा करोगे, वही लौटकर आपके पास आएगा।
जब बिखरने लगा था परिवार, तब मिला दादी को सहारा
यह बात तब की है जब हमारे परिवार का बंटवारा हुआ था। उस मुश्किल समय में हमारी दादी को किसी ने भी अपने साथ रखना स्वीकार नहीं किया। तब पापा के मामाजी ने आगे बढ़कर मेरे मम्मी-पापा को दादी की पूरी जिम्मेदारी सौंपी। मामाजी ने दादी से कहा था—“आज से सिर्फ यही तुम्हारा घर है, यहीं जीना है और यहीं मरना है।” हमारी दादी ने अपने भाई की इस बात को अपने आखिरी समय तक निभाया। वे लगभग 25-26 सालों तक हमारे पास रहीं, पर कभी किसी दूसरे बेटे के घर नहीं गईं।
दादी का त्याग और मम्मी-पापा की सेवा
मेरी मम्मी टीचर थीं। अगर कभी स्कूल से आने में मम्मी को देर हो जाती और दादी भूखी भी होतीं, तब भी वे किसी से शिकायत नहीं करती थीं कि मुझे भूख लगी है। मम्मी-पापा ने उनकी इतनी दिल से सेवा की कि दादी के मुंह से हमेशा हमारे लिए दिल से आशीर्वाद ही निकलता था।
हम बच्चे भी हमेशा अपनी दादी के साए में रहे। उनके हाथ से खाना खाना, उनके पास सोना, उनसे पुरानी बातें और कहानियाँ सुनना हमें बहुत अच्छा लगता था। और हाँ! जब कभी कोई गलती होने पर मम्मी मारती थीं, तो हमारा सबसे सुरक्षित ठिकाना दादी ही होती थीं, हम तुरंत उनके पीछे जाकर छुप जाते थे। कितने सुंदर थे वे दिन!
आशीर्वाद का फल
आज उन्हीं के आशीर्वाद का असर है कि हम लोग पढ़-लिखकर कामयाब हुए और हमारे परिवार में एक प्यारा सा छोटा भाई भी है। हम आज भी अपनी दादी को बहुत मिस करते हैं, वे दुनिया की सबसे बेस्ट (World’s Best) दादी थीं।
‘हमारी दुनिया’ का संदेश
तो दोस्तों! अगर आपके घर में भी कोई ऐसे बुजुर्ग हैं, तो उनका ख्याल रखिए। उन्हें थोड़ा सा समय दीजिए, क्योंकि हमारे साथ रहने के लिए अब उनके पास बहुत ज्यादा वक्त नहीं बचा है।
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