हरे-भरे पेड़-पौधे और हमारे बुजुर्ग

दोस्तों, हरे-भरे पेड़-पौधे सिर्फ प्रकृति के लिए ही नहीं, हम सबके लिए भी बहुत आवश्यक हैं। आप सब जानते ही होंगे कि ये पेड़-पौधे, छोटे हों या बड़े, कुछ न कुछ देते ही रहते हैं। बदले में बस थोड़ी सी देखभाल और प्यार ही तो चाहते हैं। अगर समझा जाए तो हमारी दुनिया में पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और हमारे बुजुर्ग एक जैसे ही तो होते हैं। इन सबको ही थोड़ी सी देखभाल और प्यार की आवश्यकता होती है। ये हमसे हमारा थोड़ा सा वक्त चाहते हैं—वो वक्त जो सिर्फ इनके लिए ही हो। जिस वक्त में हम इनसे और ये हमसे बातें कर सकें, इन्हें अपने बारे में बताएं, कुछ पुराने लम्हे, कुछ नई बातें, थोड़ी हँसी-मजाक। बस, इससे ज्यादा और किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं होती इनको।

हमारे गाँव में पहले हमारा घर और घेर (जहाँ पर गाय-भैंस रहती हैं) अलग-अलग था। गाँव के अंदर घर था और गाँव के बाहर घेर था। वैसे तो गाँव में बहुत सारे पेड़-पौधे और पशु-पक्षी थे, पर हमारे घेर पर एक पेड़ था पीपल का। इतना प्यारा और हरा-भरा था, बहुत सारे पक्षी उस पर घर बनाकर रहते थे। उसके नीचे गहरी छाँव में हमारे जानवर और गाँव के बहुत सारे लोग अपनी-अपनी चारपाई डालकर आराम करते थे। पहले एसी, पंखा ज्यादा नहीं होते थे ना, इसलिए सब पेड़ की छाँव की खोज में रहते थे। उस पीपल के पेड़ की छाँव इतनी गहरी थी कि हल्की बारिश का पानी भी नीचे नहीं आता था। सारे बच्चे भी पेड़ के नीचे खेलते रहते थे।

इसी पीपल के नीचे खेलकर हम बड़े हुए हैं। अब हमने अपना घर घेर में ही बना लिया है और आज भी वो पीपल हमारे घर के सामने है। आज उसकी उम्र लगभग 150 साल हो गई है। वो पीपल हमारे दादाजी के पिताजी ने लगाया था, सोचिए कितना पुराना है! हम लोग छोटे थे, तब कुछ लोग बोलते थे कि पीपल पर भूत रहते हैं, बच्चों को इसके नीचे नहीं जाना चाहिए, वहाँ बैठकर कुछ खाना-पीना नहीं चाहिए। हम डरने लगे, फिर हमारी दादी ने बताया कि पीपल की पूजा की जाती है, इस पर देवताओं का वास होता है और पीपल की पूजा करने से पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। पीपल की जड़ में विष्णु भगवान, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में भगवान हरि और फलों में देवताओं का वास होता है। पीपल का वृक्ष भगवान विष्णु स्वरूप है, महात्मा इसकी सेवा करते हैं और यह मनुष्य के पापों को नष्ट करने वाला है।

पीपल पर पितरों और तीर्थों का भी निवास होता है। पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए रोजाना पीपल की जड़ में जल अर्पित करना चाहिए। पीपल की पूजा करने से पितृदोष से भी छुटकारा मिलता है। दादी की बातें सुनकर हम लोग फिर कभी नहीं डरे और पीपल के नीचे खेलकर बड़े हुए हैं। आज भी सब लोग उस पीपल की पूजा करते हैं, उसकी छाया हमारे पूरे घर पर फैली हुई है। पीपल की छाँव में ट्यूबवेल बनी हुई है, उसका पानी बहुत ठंडा रहता है और यह सब पीपल की छाँव की वजह से ही है। यह हवा को भी शुद्ध करता है। हम अपने पीपल के पेड़ की देखभाल अच्छे से करते हैं और वो हमारी करता है। वो हमारे बुजुर्गों का आशीर्वाद है हमारे लिए ओर अब वो भी बुजुर्ग हो गया है। इसलिए ही उसकी छाँव में बैठकर ऐसी खुशी मिलती है जैसे दादाजी और दादीजी की गोद में बैठकर खुशी मिलती थी।

5 thoughts on “हरे-भरे पेड़-पौधे और हमारे बुजुर्ग”

  1. पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं बढ़ाते, बल्कि इस धरती के फेफड़े हैं। इन्हें बचाना, खुद के जीवन को बचाने जैसा है।

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