ओम शं शनैश्चराय नमः।
नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका आपकी अपनी वेबसाइट ‘हमारी दुनिया’ (humariduniya.in) में।
‘स्वाभिमान’ सीरीज़ के पिछले भागों में आपने मेरी बड़ी दीदी बुलबुल और छोटी बहन ज्योति की कहानियाँ पढ़ीं। आज भाग-5 में, मैं आपको मिलवाने जा रही हूँ हमारी सबसे छोटी, नटखट और हम सबकी लाडली बहन शिखा से। वैसे तो उसका पूरा नाम ‘अनुशिखा’ है, पर घर में सब प्यार से उसे छोटा सा नाम ‘शिखा’ ही बुलाते हैं।
शिखा हम तीनों बहनों से छोटी है। वह ज्योति से पूरे 7 साल बाद पैदा हुई थी, लेकिन हमारे इकलौते भाई अभय से बड़ी है।
👑 चार मां-बाप का प्यार और बचपन से ही पढ़ाई का शौक
शिखा बहनों में सबसे छोटी है, इसलिए ज़ाहिर है कि वो हम सबकी सबसे ज़्यादा लाडली है। मम्मी-पापा तो हम सभी बच्चों को बराबर प्यार करते हैं, लेकिन शिखा को थोड़ा ज़्यादा प्यार मिला क्योंकि मम्मी-पापा के साथ-साथ उसे लाड लड़ाने और उसकी हर ज़िद पूरी करने के लिए हम तीन बड़ी बहनें भी तो थीं! इसी वजह से वह थोड़ी ज़िद्दी और बहुत ज़्यादा शरारती है, पर साथ ही उतनी ही समझदार भी है।
शिखा और अभय एक साथ स्कूल जाते थे। वह स्कूल और घर दोनों जगह अपने छोटे भाई का एक माँ की तरह ख्याल रखती थी। उसके साथ खेलना, पढ़ाई में मदद करना और मिलकर शैतानियां करना—यही उनका रोज़ का नियम था।
शिखा को बचपन से ही पढ़ने और पढ़ाने का बहुत शौक था। हमारी मम्मी एक प्री-स्कूल टीचर हैं, इसलिए वो छोटी सी शिखा को अपने साथ स्कूल ले जाया करती थीं। यही वजह रही कि शिखा बहुत जल्दी पढ़ना-लिखना और स्कूल जाना सीख गई। वह पढ़ाई में हमेशा आगे रही। उसकी पूरी स्कूली शिक्षा मोदीनगर के एक इंग्लिश मीडियम स्कूल से हुई और कॉलेज की पढ़ाई मेरठ से हुई, जहाँ से अब उसने अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) भी पूरी कर ली है।
💖 ज़िंदगी का एक नया सफ़र: अक्की (अमन) के साथ
जब शिखा ग्रेजुएशन सेकंड ईयर में थी, तब उसकी लाइफ में अक्की (अमन) आए। अमन उसके फर्स्ट ईयर से ही क्लासमेट और अच्छे दोस्त थे। अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने या प्रपोजल एक्सेप्ट करने से पहले शिखा ने सबसे पहले आकर मुझे बताया था। अमन सचमुच बहुत ही सुलझे हुए, अच्छे और ज़िम्मेदार लड़के हैं। उनका रिश्ता शिखा के साथ-साथ हम सभी भाई-बहनों और परिवार के साथ भी बहुत गहरा और सम्मानजनक है। दोनों की फैमिली इस रिश्ते से खुश और सहमत हैं, हालांकि शादी में अभी 3 से 4 साल का समय लगेगा।
✨ फैशन सेंस और गाँव बनाम शहर का अंतर
शिखा का फैशन सेंस बिल्कुल हमारी बड़ी दीदी जैसा शानदार है। मैं और ज्योति तो शुरू से थोड़े सिंपल रहे हैं—ज्योति को अपना वही पुराना बॉयज़ लुक अच्छा लगता था, और मुझे बचपन में तो सजने का शौक था, पर जैसे-जैसे बड़ी हुई और ज़िम्मेदारियाँ आईं, तो मेरे बचपन के सपने और ख्वाहिशें कहीं पीछे छूट गईं।
लेकिन हमने शिखा के साथ ऐसा कभी नहीं होने दिया। उसकी जो भी सही ख्वाहिश होती, हम सब मिलकर उसे पूरा करते। वैसे भी, हम लोग गाँव में पले-बढ़े थे और शिखा शहर में बड़ी हुई; हमारे और उसके समय में काफी अंतर भी आ चुका था। हमारी हमेशा यही कोशिश रही कि शिखा का कोई भी सपना अधूरा न रहे।
🥺 एक अधूरा सपना… जिसका मलाल हमेशा रहेगा
पर कहते हैं ना कि ज़िंदगी में सब कुछ हर किसी को नहीं मिलता। शिखा का भी एक सपना अधूरा रह गया, जिसका अफ़सोस मुझे हमेशा रहेगा। वह आगे की पढ़ाई के लिए देहरादून जाना चाहती थी। लेकिन ठीक उसी समय भाई अभय की उच्च शिक्षा का भी समय था, उसे भी बाहर पढ़ने भेजना था। उसी दौरान ज्योति की शादी भी हुई थी। एक मिडिल क्लास (मध्यमवर्गीय) परिवार के लिए एक साथ इतने बड़े खर्चे संभालना बहुत बड़ी बात होती है।
आखिरकार, भाई के भविष्य और परिस्थितियों को देखते हुए शिखा का वो सपना हमें रोकना पड़ा और उसे मेरठ यूनिवर्सिटी भेजना पड़ा। हालांकि वहाँ भी उसकी पढ़ाई बहुत अच्छे से हुई, पर कहीं न कहीं उसके मन के कोने में यह बात हमेशा रहेगी। इन सब के बावजूद, वह आज भी हमारी लिटिल प्रिंसेस (Little Princess) है और हमने उसे एक राजकुमारी की तरह ही पाला है।
📸 बच्चों की फेवरेट ‘मासी’ और फोटोशूट की दीवानी
आज शिखा बड़ी दीदी और ज्योति के बच्चों की सबसे बेस्ट ‘मासी’ है। उसे छोटे बच्चों से इतना प्यार है कि बच्चों को देखते ही वो खुद भी बिल्कुल छोटी बच्ची बन जाती है। और हाँ! सबसे बड़ी बात… शिखा को फोटोशूट कराने का सबसे ज़्यादा और पागलपन की हद तक शौक है!
ऐसी ही है हमारी शिखा—सबसे नटखट, सबसे शरारती, बेहद क्यूट और उतनी ही समझदार। हमारी दुनिया में यह कभी बड़ी नहीं होगी, यह हमेशा हमारी छोटी राजकुमारी ही रहेगी।
🔮 स्वाभिमान (भाग 6) की एक छोटी सी झलक
दोस्तों, ‘स्वाभिमान’ सीरीज़ के अगले भाग (भाग-6) में हम बात करेंगे हमारी दुनिया के इकलौते ‘लिटिल प्रिंस’ की—यानी हमारा छोटा भाई अभय, जिसमें हम चारों बहनों की जान बसती है।
ओम हनुमते नमः।
💬 अपनी मीठी यादें शेयर करें
दोस्तों, भाई-बहन का रिश्ता दुनिया का सबसे अनमोल तोहफ़ा होता है। अगर आपके पास भी अपने भाई या बहन से जुड़ी कोई ऐसी ही खट्टी-मीठी या कोई प्यारी सी याद हो, तो प्लीज नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर हमारे साथ ज़रूर शेयर करें! तब तक के लिए धन्यवाद।

Kya baat h such me true story h
Bhut badhiya
Very good