नमस्ते दोस्तों! ‘हमारी दुनिया‘ में आप सभी का स्वागत है।
आज ‘हमारी दुनिया’ में हम एक ऐसे विषय पर बात करने जा रहे हैं, जो सीधे हमारे समाज की सोच और इंसानियत से जुड़ा है—“बेटियों के अधिकार”। लेकिन कुछ भी बताने से पहले, मेरा आप सभी से एक सीधा सा सवाल है… आखिर बेटियों को अपने अधिकार खुद-ब-खुद क्यों नहीं मिलते? जैसे बेटों को उनके सारे हक बिना मांगे मिल जाते हैं, वैसे बेटियों को हर एक अधिकार के लिए लड़ना क्यों पड़ता है?
चाहे वो इस दुनिया में जन्म लेने का अधिकार हो, पढ़ने-लिखने का अधिकार हो या फिर अपनी मर्जी से अपने सपनों की ऊँचाई को छूने का अधिकार हो… क्यों उन्हें हर कदम पर सिर्फ और सिर्फ संघर्ष ही करना पड़ता है? आखिर क्यों?
कोख से शुरू होने वाला वो अनकहा संघर्ष
एक लड़की का संघर्ष तो उसके जन्म से भी पहले शुरू हो जाता है। आज के इस आधुनिक युग में भी बहुत से लोग बेटियों को ‘बोझ’ समझते हैं और उन्हें पैदा होने से पहले ही कोख में खत्म कर देते हैं। और अगर खुदा न ख्वास्ता उसका जन्म हो भी जाए, तो कुछ घरों में आज भी मातम छा जाता है।
मुझे सबसे ज्यादा हैरान और दुखी तो यह बात करती है कि एक बेटी को जन्म देने वाली माँ, दादी, बुआ, ताई, चाची, मौसी, मामी—ये सब खुद भी तो महिलाएं ही हैं! लेकिन इनमें से भी कई लोग बेटी के जन्म पर खुश नहीं होतीं। बल्कि बड़े दुख और अफ़सोस के साथ कहती हैं, “अरे! ये क्या हुआ? बेटी हो गई? हाय… बेटा ही हो जाता! अब एक और बोझ बढ़ गया।”
किसने दिया है दूसरों का हक छीनने का अधिकार?
मुझे आज तक समझ नहीं आया कि हमारी इस दुनिया में भगवान ऐसे लोगों को पैदा ही क्यों करते हैं, जो किसी मासूम से उसके पैदा होने का, उसके जीने का अधिकार छीन लें? लोग यह बात क्यों भूल जाते हैं कि:
“बेटा तो सिर्फ भाग्य से पैदा होता है, पर बेटियाँ सौ भाग्य (सौभाग्य) से पैदा होती हैं!”
आज मैं इस मंच से समाज के उन ठेकेदारों से पूछना चाहती हूँ कि आखिर आपको किसने यह हक दिया कि आप एक बेटी से उसके जीने का अधिकार छीनें?
आज की सीख
बेटियाँ कोई बोझ नहीं, बल्कि घर की रौनक और लक्ष्मी होती हैं। उन्हें किसी के अहसान या दान की जरूरत नहीं है, उन्हें सिर्फ उनके वो अधिकार चाहिए जो कुदरत ने उन्हें दिए हैं। अपनी बेटियों को पढ़ाइए, उन्हें मजबूत बनाइए और उनके सपनों को पंख दीजिए। जब एक बेटी मुस्कुराती है, तो पूरी दुनिया मुस्कुराती है।
आपकी क्या राय है?
क्या आपको भी लगता है कि आज के समाज में बेटियों के प्रति सोच बदलने की सख्त जरूरत है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय और विचार हमारे साथ जरूर साझा करें!

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